कब हटेगा काश्मीर से Article 370 ?
पुलवामा के कायराना हमले की पृष्ठभूमि में जहाँ देश भयंकर रोष और आक्रोश से भरा पड़ा है और पाकिस्तान तथा इस्लामी कट्टरपंथी ताक़तों को मुहतोड़ जवाब देने के लिए सरकार की और विश्वास से देख रहा है वहीं देश में एक तबका ऐसा भी है जो इस गंभीर परिस्थिति को अपने राजनितिक हितों की दृष्टी से देख कर सरकार और कुछ हद तक सशत्र बलों के खिलाफ भी खड़ा दिख रहा है l ये तबका अपनी निजी हितों को तार्किकता का स्वरुप देने के लिए ‘काश्मीर की समस्या के राजनीतिक समाधान” की बात कर रहा है जबकि वास्तविकता ये है की इन्हें खुद भी विषय की पेंचीदगी के बारे में कुछ हद तक पता है और ये जानते है कि काश्मीर में बढ़ते इस्लामिक कट्टरपंथ और पाकिस्तान प्रायोजित हिंसा के बीच ये बातें जुमलों से ज्यादा कुछ भी नहीं हैं l काश्मीर की समस्या एक बहु ध्रुवीय समस्या है जिसके कुछ मुख्या बिम्बों में राष्ट्रीय अखंडता एवं सुरक्षा, लोकतान्त्रिक व्यवस्था तथा सस्ते राजनीतिक हित दिखते हैl .
काश्मीर भारत पाकिस्तान की सीमा का सबसे विवादित हिस्सा है l इस विवाद में जितना योगदान आज़ादी के बाद की सरकारों लचर रवैये का है उतना ही योगदान कमोबेश वहां की भौगोलिक परिस्थियों का है l आज भले ही पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर आजाद काश्मीर की बात करता हो लेकिन अपने जन्म के समय से ही मुस्लिम कट्टरपंथ की सोच में डूबा हुआ पाकिस्तान मुस्लिम बहुलता वाले काश्मीर पर अपना सैद्धांतिक हक समझता है lकाश्मीर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुई क्रूर जातीय हिंसा में पाकिस्तान का कूटनीतिक स्मार्थ्गन तथा आतंकियों को इसके द्वारा समय समय पर मुहैया किये जाने वाले हथियार और प्रशिक्षण स्वयं साक्ष्य हैं l ऐसे में भारत तथा पाकिस्तानी आर्मी आर्मी के दबाव और चीन के क़र्ज़ से चलने वाले पाकिस्तान के बीच काश्मीर विवाद समाप्त होने की सम्भावना निकट भविष्य में नज़र नहीं आती l
कश्मीर स्थित भारत पाकिस्तान सीमा विश्व के सबसे दुष्कर युद्ध क्षेत्रों में से एक है l भौगोलिक परिस्थियाँ जिसमे सियाचिन ग्लेशियर से लेकर वर्षभर नहने वाली कईं नदियाँ तथा साल में आधे समय बर्फ में ढके रहने वाले कई और भूभाग भी हैं l इन परिथितियों में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को पूरी तरह रोक पाना असंभव ही लगता है l
अब सवाल उठता है काश्मीर की आन्तरिक व्यव्वास्था का , जो की चरमराई हुई सी दिखती है l काश्मीर स्थापित स्थानीय राजनितिक दलतथा अलगाववादी धड़े पिछले ७० सालों में इस बात से भली बात से अवगत हैं की उनके व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए अशांत काश्मीर ही सबसे उपयुक्त है l जहाँ एक तरफ पाकिस्तान उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों के नाम पर धन मुहैय्या करता रहता है ,जिसके प्रमाण हमने पिछले तीन वर्षों में प्रवर्तन निदेशालय .राष्ट्रीय जांच एजेंसी आदि के अनेक छापों में देखे हैं l वहीँ दूसरी तरफ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३७० तथा ३५अ के दायरे में बंधी भारत सरकार से जम्मू और काश्मीर के विकास के लिए आने वाले मदद का बेरोकटोक दुरूपयोग स्थानीय दलों की सरकारे तथा राजनितिक ब्लैकमेल करके अलगाववादी नेता अपने निजी हितों के लिए करते रहे हैं l
ये नेता काश्मीर के गरीब किसान-काश्तकार तबकों के नहीं हैं ये वहां के पुराने आमिर है तथा कुछ नए अमीर है जिन्होंने काश्मीर की अशांति से गरीब कश्मीरियों का हक और खून पी कर अपने दिन फिरा लिए l काश्मीर के इन अमीर नेताओं में वहां के अलगाववादियों के साथ वहां के दोनों मुख्या स्थानीय दलों के राजनीतिक नेता नेता भी शामिल है lजहाँ आम कश्मीरी या तो गरीबी में जी रहा होता है या फिर इस्लामिक कट्टरपंथ या अलगाववादी आतंकवाद का शिकार हो दहशतगर्द बन रहा होता है वहीँ इनके बच्चे आम कश्मीरियों के हक के पैसों और उबके खून की कीमत पर विदेशों में पढ़ कर आरामतलब ज़िन्दगी गुज़ार रहे होते हैं l
काश्मीर का राजनीतिक समाधान है काश्मीर के समाज को वहां के युवाओं को मुख्या धारा में लाना l जिसके लिए भारत सरकार द्वारा चलायी जा रही उडान ,हिमायत जैसी अनेकों योजनाओं के अलावा वहां खुले बाज़ार ,व्यापर ,उद्योग तथा आधुनिक शिक्षा की आवश्यकता है l मगर काश्मीर के गरीब किसानो काश्तकारों और युवाओं के भविष्य की लाश पर रोटी सकने वाले काश्मीर के वर्तमान मठाधीश इस बात से भली भांति परिचित हैं कि एक आधुनिक और विकासशील काश्मीर एक समता मूलक प्रगतिशील समाज की ओरे बढ़ जायेगा जहाँ इन मठाधीशों की सत्ता, शक्ति, जागीर तथा उनके इस्लामिक कट्टरपंथ के हथियार सभी खाक में मिल जायेंगे l



Nicely written brother !!